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Friday, October 26, 2012

माँ तुम्हें प्रणाम

मुझे दुनियाँ में लाने के लिए तुम्हें प्रणाम, 
खुद जगके मुझे सुलाने के लिए तुम्हें प्रणाम, 
दौड़ धूप में आँचल में मुझे छुपाने को तुम्हें प्रणाम, 
रात में डरने पर गले लगाने को तुम्हें प्रणाम, 
मेरी अनकही बातें समझने को तुम्हें प्रणाम, 
मेरे थक जाने पर सहलाने को तुम्हें प्रणाम, 
मुझे जीना सिखाने को तुम्हें प्रणाम, 
बुरी नज़र से बचने का टीका लगाने को तुम्हें प्रणाम, 
सर्दी में छाती से लगाने को तुम्हें प्रणाम, 
गर्मी में रात भर जागकर पंखा झुलाने को तुम्हें प्रणाम, 
बारिश में कीचड से बचाने को तुम्हें प्रणाम, 
मेरे डगमगाने पर अपनी उंगली थमाने को तुम्हें प्रणाम, 
पल ख़ुशी का हो या गम का, मेरा चेहरा देख मुस्कारने को तुम्हें प्रणाम, 
खिलौना टूटने पे रोने से चुप कराने को तुम्हें प्रणाम, 
राजा-रानी और परियों के किस्से सुनाने को तुम्हें प्रणाम, 
मेरे जीवन में मधुर संगीत लाने को तुम्हें प्रणाम, 
रूठने पर मुझे मनाने को तुम्हें प्रणाम, 
मेरी हर गलती माफ़ करने को तुम्हें प्रणाम, 
प्रेरणा और धैर्य का स्रोत होने को तुम्हें प्रणाम, 
मेरे लिए तेरी हर दुआ हर कर्म को तुम्हें प्रणाम,
मुझे दुनियाँ में लाने को तुम्हें प्रणाम..