उस शाम जब तुम
खड़ी थी समुन्दर के किनारे;
लग रहा था मानो कुदरत ने
समुन्दर को कैनवास बना के
तुम्हारी तस्वीर बना दी हो;
पानी में उठती लहरें
और हवा के झोंके से उड़ती तुम्हारी लटें,
लगता था कुदरत उस समुंदरी कैनवास में
खूबसूरत
बारीकियाँ जोड़ रही हो।
हवा की सरसराहट में तुम्हारी नटखट सी हँसी
और
शरारती आँखों ने,
उस पल को चिरस्मर्णीय बना दिया।
अब जब किसी शाम भीगी हवा चेहरे को छू जाती है,
तब उस शाम की खूबसूरत तस्वीर,
तुम्हारी शरारती आँखों और
कॉफीन लब एक साथ दिल
में गुदगुदी मचा जाते हैं।