अभी तक तो सुना था, पढ़ा था,
कि "ज़िन्दगी खूबसूरत है".
कल रात जब ज़िन्दगी से मुलाकात हो गयी,
तो पता चला ज़िन्दगी सच में बेहद खूबसूरत है.
बेहद चंचल, बेहद मासूम , और
अदब-ओ-आबरू की तो बात ही क्या.
हर लफ्ज़ में मानो शहद मिला हो,
और जुमले की तो यारो बात ही क्या थी.
सादगी का श्रंगार, मासूमियत का गहना,
उसकी खूबसूरती में चार चाँद लगा रहे थे.
लोग तमन्ना करते हैं सालों जीने की,
हमें तो उस ज़िन्दगी के साथ सदियाँ भी छोटी लगेंगी.
बेहद शुक्र गुज़ार हूँ उस ज़िन्दगी का,
जिसने मेरी असल ज़िन्दगी से मुलाकात करा दी.
अभी तक तो सुना था, पढ़ा था,
कि "ज़िन्दगी खूबसूरत है".
कल रात जब ज़िन्दगी से मुलाकात हुई,
तो पता चला ज़िन्दगी सच में बेहद खूबसूरत है.
Friday, February 25, 2011
Thursday, February 17, 2011
बात कुछ अरसे पहले की है
बात कुछ अरसे पहले की है,
जब वो मिले थे हमें इत्तेफाक से.
उनके लिए ये महज़ मुलाकात ही थी शायद,
पर हमारी तो जैसे बरसों की आरजू पूरी हुई थी.
लगा कि शायद मेहरबान है 'खुदा',
ऐसा हम नहीं हमारे कुछ दोस्त कहते हैं.
उस मुट्ठी से दिल में गुदगुदी हुई,
सोचा "इकतरफा" इज़हार कर ही दूं.
क्या करता, बेचारे दिल ने तो खूब साथ दिया,
पर कमबख्त जुबान ने पलटी न खायी.
बात वो अब तक अनकही सी ही है,
बस लगता है एक पौध से दरख्त हो गयी है.
बात वो कुछ अरसे पहले की है,
जब वो मिले थे इत्तेफाक से .......
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