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Sunday, June 7, 2020

at the end

i will meet you at the other end,
at the end of the world
at the end of the horizon
that we see far far away.
i dont know if you will come
but i will wait for you
there, at the end.

इश्क

इश्क की कशिश,
सफ़र की खुशबू,
नज़र का जादू,
रूह का सुकून,
लौट भी चल
अये दिल मेरे,
ठिकाना कोई
नया तलाश.

sometimes

sometimes life
traces its path
in the trails
that are
left by
past
like
t
h
i
s

if only

if only we could win over egos
if only love was stronger
if only we could reconcile
if only we could feel each other
if only we could keep promises
if only we could be what we are
if only we could walk in darkness
if only we could talk in silence
if only we could hold each other
if only life would have been less cruel.
if only it would have been just a dream.

aajkal


yahan wahan
gali gali
shehar shehar
dhoop chhanv
pehar pehar
yaad teri
dagar dagar
mili mujhe
abhi subah.
tu yahin
main yahin
fir bhi hum
mile nhin.
kya hua
pata nhin
shikawe gile
mite nhin
tum yahin
hum yahin
fir bhi dil
mile nhin.

waits

some waits
remain waits,
no matter
how fast you run
to bridge the gap
between lapses.
some wait
are harder than
anything,
they test you,
your memory,
your ability
to forget
the things and
the people.
some waits are
heavier than
what heart can carry.
some waits are
unending and
endless like
circles.
some waits
are weights
to carry till
the end.

कविता

जब चलते चलते यूँ ही
तुमने हाथ को पकड़
उँगलियों की रिक्तता को
पूर्णता का एहसास कराया
तो तुमने मेरे जीवन की
सबसे खुबसूरत
कविता लिखी थी दोस्त.

सपनों की बुनाई

मैं जब रात में कभी
किराये के कमरे की छत पर जाता हूँ
तो पास की बिल्डिंग के एक कमरे में
पंद्रह बीस आदमी सिलाई मशीन चलाते
कपडे बुनते नज़र आते हैं.
जब दुनिया नींद में अपने सपने बुनती है
तब ये लोग कपड़े बुनकर सपने बुनते हैं.
फिर सोचने लगता हूँ इनके घर वाले भी
घर पर शायद सपने बन रहे होंगे
कुछ मीठे सपने
बेटी को स्कूल भेजने के सपने
घर में फ्रिज लाने के सपने,
बेटे की पप्पी लाने की जिद मानने के सपने
और भी न जाने क्या क्या.
हम सब सपने बुनते हैं
कभी सड़क पर चलते हुए
कभी किसी खास से मिलकर.
सपने बुनना जिंदा रहने की निशानी है,
ये एक मानवीय कला भी है शायद.
आज सिलाई मशीन देखकर याद आया
मैंने बहुत दिनों से सपने नहीं बुने हैं
आज मैं भी कुछ एक सपने बुनूँगा
और उनको सरहाने रखकर सो जाऊंगा.

प्यार विद्रोह है

प्यार विद्रोह है
पितृवाद के ख़िलाफ़,
सामंतवाद के खिलाफ,
मनुवाद के ख़िलाफ़।

प्यार विद्रोह है
हर उस सोच के ख़िलाफ़
जो आभिजात्यता को
सींचती संजोती है।

प्यार ख़तरा है
खूनी पाकीज़गी को।
प्यार ख़तरा है उन सबके वजूद को
जो इंसान को इंसान नहीं मानते।

प्रिय बाबासाहेब

बाबासाहेब छह दशक हो गये जब से आप हमको छोड़ गये हैं,
इस दरमयान हमने बहुत कुछ खोया भी है, और कुछ पाया भी.
जो खोया उसका लेखाजोखा आप भी रख रहे होंगे कहीं दूर,
लेकिन जो पाया है हमको पता है वो काफी नहीं है.
सच कहूँ तो कुछ भी नहीं है उसके बराबर जो आपने सोचा होगा.
लेकिन जो चिंगारी आपने जलाई थी वो अभी भी सुलघ रही है,
कहीं बस राख में जिंदा है, तो कहीं सुलघने की कगार पर.
कुछ अफसर भी बने हैं हम में, कुछ अभी भी वहीँ है जहाँ आप छोड़ गये थे,
कुछ आत्मसम्मान के लिए मरने मारने पर उतारू होने लगे हैं,
कुछ अभी भी गरीबी और लाचारी की बेड़ियों में जकड़े हैं,
आप ना होते तो ये दरिन्दे शायद कभी हमको इंसान ना मानते,
ना मानते कि हमारा भी हक है इस देश के संसाधनों में.
आपकी याद तो हर रोज़ आती है हमको,
ये याद कभी ख़ुशी का कारण होती है तो कभी दुःख का,
ख़ुशी इस बात की होती है कि आपके चलते आज हम हैं,
दुःख इसका है कि ज्यादातर अभी भी दूसरों के टुकड़ों पर पल रहे हैं.
वैसे आपने जिस बिल के लिए इस्तीफा दे दिया था,
वो आज तक इन लोगों ने नहीं आने दिया,
छुटमुत छूं छाँ करते रहते हैं लेकिन नियत नहीं बदली है इनकी.
मज़े की बात ये है कि ये इतने डर गये हैं आपसे कि,
कुछ दिनों पहले सर्वे में दूसरे सबसे महान का वोट कराये,
क्यूँ कि पहले का कराते तो गांधी गुलटायीं खा जाते,
ये बावले हक्के बक्के हुए जा रहे हैं आज कल,
पैसे के लिए आपकी लेखनी पर खुदका नाम चेप देते हैं,
हम में भी कई विभीषण हो गये हैं, कुछ बामन,
आपके नाम की आढ़ में बुद्धजीवी बनने की दौड़ में हैं,
लेकिन इनकी सोच अभी भी बद्बू मारती है.
जब किसी बेघर को देखता हूँ तो याद आ जाती है वो रात,
जब आपको एक छत के लिए भटकना पड़ा था इस महान देश में.
आपने एक गांधी देखा होगा, आज यहाँ अनगिनत गाँधी हैं,
हर घर में एक गाँधी, जो बड़ी बड़ी बातें करता है लेकिन करता कुछ नहीं.
ये गाँधी की तरह ही बोलते हैं कि ये जातिवादी नहीं है,
लेकिन बेटे बेटियों को दूसरे जाति में शादी करने पर मार देते हैं.
देखा जाये तो बहुत कुछ बदल गया है, और कुछ भी नहीं बदला,
लेकिन जैसा आपने बोला था ठीक वैसा ही करते हैं ये लोग,
इसलिए कभी ऐसा नहीं लगता कि अरे ऐसा कैसे हो गया.
मंदिर में प्रवेश की नौटंकी अब भी जारी है,
मुझे पता है आप खिन्न होंगे ये सुन कर लेकिन माजरा यही है.
चलिए बहुत हुयी दुःख भरी बातें कुछ खुश खबरी भी सुनिए,
आपकी बेटियाँ अब अपने हक और अधिकार के लिए निकल पड़ी हैं,
पिछले साल से दलित-स्त्री स्वाभिमान यात्रा जारी है पूरे देश में.
इतिहास को भी पढना और समझना आ रहा है हमको,
इस टेढ़े समाज का ढांचा भी खूब समझने लगे हैं हम.
आपके कुछ बच्चे और बच्चियां निडर होकर लड़ रहे हैं
अपने करोड़ों परिवारों के लिए जो बेजुबान हैं,
आपका लिखा संविधान हमारी ताकत बन गया है,
मनु स्मृति का दहन हर साल करते हम चूकते नहीं हैं अब.
भूत भुतडियों को हमने पूजा की अलमारी से फेंक दिया है,
दकियानूसी में भी पड़ना भूल रहे हैं हम.
आपने कहा था कि अगर कारवां आगे ना ले जा सको तो यहीं छोड़ देना,
हम इसको आगे ले जाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं,
कभी कभी टूट भी जाते हैं लेकिन हमारा संघर्ष प्रेरणा देता है,
और हम फिर से उठ कर आगे चल पढ़ते हैं.
सफ़र तो लम्बा है, लेकिन कारवां चल रहा है आपका,
जल्दी ही आपको फिर से ख़त लिखूंगा,
ख़त में फिर से कुछ दुःख की कुछ ख़ुशी की बातें होंगी,
आप यूँ ही बस हमारे साथ बने रहिये,
प्रकाश देते रहिये, हम चलते रहेंगे धीमे धीमे.
शुक्रिया बाबासाहेब.
 
~आपका अपना नाती