डर तो लगता
है कहीं कोई
खास भुला तो
ना देगा,
फिर लगता है
डर उनको रोक
भी तो न
लेगा।
डर लगता है
कहीं ये ख़ूबसूरत
खाब टूट तो
न जायेगा,
फिर लगता है
डरने से कुछ
बदल तो न
जायेगा।
डर लगता है
कहीं हम खो
तो न जायेंगे,
फिर लगता है
इससे हम लौट
तो न आएंगे।
डर लगता है
कहीं उनसे मिल
तो न पाएंगे,
फिर लगता है
डरने से वो
मिल तो न
जायेंगे।
डर लगता है
कि मंजिल तक
पहुँच न पाएंगे,
फिर लगता है
कि सोचके ऐसा
हम खुद ही
डगमगायेंगे।
डर लगता है
हर एक बात
से, हर एक
वाकया से,
जिसके घटने से
कोई खास दूर
हो जायेगा,
फिर लगता है
डर के कुछ
बेहतर भी तो
न हो पायेगा।
इसलिए दिल ने
तय किया है
कि डरेंगे नहीं।
इससे पहले कि
ज़ुबान जवाब दे
जाये,
इससे पहले कि
देह कमज़ोर और
जर्जर हो जाये,
इससे पहले कि
धड़कन थम जाये,
इससे पहले कि
आँखों कि रौशनी
जाये,
इससे पहले कि
कोई तूफ़ान आये,
अपने लबों पे
उनका नाम, आँखों
में तस्वीर,
दिल में दुआ
और साँसों में
उनकी खुश्बू बसायेंगे।