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Saturday, July 13, 2013

नन्हा पौधा

एक नन्हा सा पौधा लाया था हमने अपने आँगन में,
स्नेह प्यार लाड दुलार से थामा था अपने दामन में।
बीते बरस, महीने बीते हफ्ते बीते दिन भी बीते,
ऐसा लगता है फिर भी, अभी तो कुछ लम्हे ही बीते।
आँधी आई, झोंके आये, लू भी आई, शीत भी आई,
इन सबको झेला पौधे ने, तो फिर आगे बहार भी आई।
धीरे धीरे हौले हौले नन्हा पौधा बृक्ष बन गया,
आते हैं अब इस पर पंछी, सबका ये संसार बन गया।
अब कैसी भी आंधी आये, पानी आये गर्मी आये,
अडिग रहेगा मेरा साथी, जीवन भर का ये सहपाठी।
नहीं चाहिए हमको कुछ भी अपने इस प्यारे साथी से,
चाहा है वो अडिग बने, निर्भीक बने, दुनिया का कल्याण करे।
हम खुश यूँ होते बैठेंगे, टहनी को सहला लौटेंगे,
होंठों पे मुस्कान लिए यों ख़ुशी किसी से मिल बाँटेंगे।

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