किताबों के पन्नों को पलटते हुए बीच में दिख जाते हैं
वो पल जो बस उनके होने से खूबसूरत होते हैं।
कभी कभी इन पन्नों में लाइनों के बीच का फासला,
लगता है रेल की पटरियों सा जो मिलती नहीं पर साथ हैं,
ये पटरियां जो एक दूसरे के बोझ को खूब समझती हैं,
इसलिए साथ चलती हैं कंधे से कंधा मिलाके।
लफ़्ज़ों के बीच की दूरियाँ उन पत्तियों सी हैं,
जो पेड़ की टहनियों पर लटकी हैं सभी को जगह देते हुए।
ये पन्ना है या है तस्वीर जिंदगी की,
जो पूूरी है किसी के साथ से कुछ फासलों के साथ भी।
वो पल जो बस उनके होने से खूबसूरत होते हैं।
कभी कभी इन पन्नों में लाइनों के बीच का फासला,
लगता है रेल की पटरियों सा जो मिलती नहीं पर साथ हैं,
ये पटरियां जो एक दूसरे के बोझ को खूब समझती हैं,
इसलिए साथ चलती हैं कंधे से कंधा मिलाके।
लफ़्ज़ों के बीच की दूरियाँ उन पत्तियों सी हैं,
जो पेड़ की टहनियों पर लटकी हैं सभी को जगह देते हुए।
ये पन्ना है या है तस्वीर जिंदगी की,
जो पूूरी है किसी के साथ से कुछ फासलों के साथ भी।
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