कभी
यूँ ही हमको अपना बनाकर तो देखो,
कभी यूँ ही हमसे कुछ कहकर तो देखो,
कभी यूँ ही मेरे हाथों में अपना हाथ देकर तो देखो,
कभी यूँ ही खुद से मोहब्बत करके तो देखो,
कभी यूँ ही ये नज़रें मिलाकर तो देखो,
कभी यूँ ही ये दूरी मिटा कर तो देखो,
कभी यूँ ही ख़ामोशी को सुनकर तो देखो,
कभी यूँ ही हमको अपना बनाकर तो देखो...
कभी यूँ ही..
कभी यूँ ही हमसे कुछ कहकर तो देखो,
कभी यूँ ही मेरे हाथों में अपना हाथ देकर तो देखो,
कभी यूँ ही खुद से मोहब्बत करके तो देखो,
कभी यूँ ही ये नज़रें मिलाकर तो देखो,
कभी यूँ ही ये दूरी मिटा कर तो देखो,
कभी यूँ ही ख़ामोशी को सुनकर तो देखो,
कभी यूँ ही हमको अपना बनाकर तो देखो...
कभी यूँ ही..
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