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Friday, November 28, 2014

दस का किस्सा

रित और अनामिका रिक्शे से उतरने के बाद एक दूसरे को देखने लगे और पल भर के लिए किसी दूसरी दुनियाँ में खो गये, तभी रिक्शे वाले भैया ने टोकते हुए कहा- अरे बेटा हमाये पैसे दे दो हमको और भी सवारी लेनी है. अचानक से दोनों फिर इसी दुनियाँ में वापिस आ गये. अनामिका दो कदम पीछे हट गयी और मुंह फेर कर दो पल पहले हुए वाकये पर मुस्कराने लगी. रित ने अपने वॉलेट से सौ का नोट निकाला और बाकी बीस को टटोलने लगा वॉलेट की दूसरी जेब में. जेब में १०-१० के दो सिक्के मिल गये और किराया पूरा हो गया १२० रूपये. रित ने हाथ बढाया ही था कि अन्नू(कभी कभी दोनों एक दूसरे को ऊटपटांग नामों से बुलाते हैं लेकिन दुनियाँ के सामने ऐसे नाम लेने से बचते हैं) ने रित का हाथ पकड़ लिया और बोली- रुक! रुक! मेरे पास है चेंज. रिक्शा वाले भैया और रित दोनों जोर से हंस पड़े और एक साथ बोले- ये भी तो चेंज ही है. अन्नू को दोनों का मजाक रत्ती भर भी पसंद नहीं आया और झट से बीस का कागज का नोट रित को थमाया और १०-१० के सिक्के वापस रख दिए रित के वॉलेट में. रिक्शे वाले भैया अपना भाडा लेके आगे बढ़ गये.
दो मिनट दोनों कुछ नहीं बोले, फिर रित ने चुप्पी तोड़ते हुए अन्नू से पूछ ही लिया- तुमको १०-१० के सिक्के इतने अच्छे लगते हैं? अन्नू ने जवाब में कुछ नहीं कहा. लेकिन उसकी हल्की सी मुस्कान और बच्चे की सी आँखों की चमक देख कर जवाब की जरूरत नहीं रही. रित ने दोनों सिक्के इठलाती अन्नू की हथेली पर रख दिए और मुट्ठी बंद कर दी. दोनों एक दूसरे को देख कर जोर से हंसने लगे. बरसों बीत गये इस दस के किस्से को. रित की नज़र अब इन १०-१० के सिक्कों पर रहती है, इनको इकट्ठा करने में उसे बड़ा मज़ा आता है. और आये भी क्यूँ न, ये एक १० का सिक्का करोड़ों की मुस्कान जो ले आता है अनामिका के चेहरे पर.

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