शहर के उस पार गए नहीं कभी,
चलो उधर आज चलके देखते हैं.
ना-खुश सा है ये दिल न जाने क्यूँ,
चलो इसको ज़रा खुश करके देखते हैं .
देखा है जिस ख़ुशी को आज तक बस सपनों में,
चलो आज उससे ज़रा मिलके देखते हैं.
फिरे हैं आज तक अकेले जिन गलियों में,
चलो आज उनके साथ चलके देखते हैं.
बात जो दबी है दिल में अरसे से,
चलो उसे ज़ुबां पे लाके देखते हैं.
ऐसे तो सोना पसंद है हमको,
पर आज थोडा जाग के देखते हैं.
वैसे तो कश्ती दूर है बहुत,
पर कम-से-कम साहिल पे जाके तो देखते हैं.
चलो उधर आज चलके देखते हैं.
ना-खुश सा है ये दिल न जाने क्यूँ,
चलो इसको ज़रा खुश करके देखते हैं .
देखा है जिस ख़ुशी को आज तक बस सपनों में,
चलो आज उससे ज़रा मिलके देखते हैं.
फिरे हैं आज तक अकेले जिन गलियों में,
चलो आज उनके साथ चलके देखते हैं.
बात जो दबी है दिल में अरसे से,
चलो उसे ज़ुबां पे लाके देखते हैं.
ऐसे तो सोना पसंद है हमको,
पर आज थोडा जाग के देखते हैं.
वैसे तो कश्ती दूर है बहुत,
पर कम-से-कम साहिल पे जाके तो देखते हैं.
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