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Tuesday, December 9, 2014

मेहरुनी पल

अभी अभी एक छोटा सा ख्याल आया,
जब आप मेहरुनी शूट में थे वो दिन याद आया।
वक़्त शाम का था फिज़ा में लाली सी थी,
हवा के झोंके ने ज़ुल्फ आपकी बिखेरी सी थी।
आपके कॉफ़ीन लबों पर मंद सी मुस्कराहट थी,
लगा था मानो हवा के झोंके ने आपको गुदगुदी की थी।
इस दिलखुश मंजर को चोरी चोरी देखते रहे थे हम,
फिर कुछ देर में दरवाजे के पीछे आप हो गये थे गुम।

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